
प्रतिभावान छात्र हुए सम्मानित
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एमसीडी के प्राइमरी स्कूल के बच्चे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए अपशिष्ट प्रबंधन सीखकर इसके विशेषज्ञ बन गए हैं। क्लास में इन्हें कंम्यूटर, टैब, मोबाइल के जरिए स्टोरी, एनीमेशन, वीडियो के माध्यम से स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, से नो टू प्लास्टिक जैसे विषयों को पढ़ाया गया है, जिसे ये दूसरे बच्चों और जहां ये रहते हैं उन कॉलोनियों में लोगों को सिखा रहे हैं।
निगम ने करीब नौ महीने पहले केशवपुरम जोन में 25 स्कूलों के अंदर एआई की कक्षाएं पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू कराई थीं। इन कक्षाओं के 137 छात्रों ने अपशिष्ट प्रबंधन पर अपनी बेहतर समझ से बड़े-बड़़ों को चौंका दिया है। निगम ने मिली इस सफलता के बाद अब अगले शैक्षणिक सत्र से अपने सभी 1535 स्कूलों में एआई लर्निंग कक्षाएं शुरू करने की योजना बनाई है।
एआई लर्निंग के माध्यम से स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक शिक्षा को विकसित करना निगम का मुख्य लक्ष्य है। एमसीडी की उप शिक्षा निदेशक (डीडीई) मंजू खत्री ने बताया कि पिछले साल जून में आईटीसी वाओ, सुल्तान चंद प्रकाशन, ई-श्री फाउंडेशन और मेथडाई-एआई लर्निंग प्लेटफॉर्म के सहयोग से छात्रों को एआई के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में शिक्षित करने के लिए एआई लर्निंग कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी।
कैसे चलती हैं कक्षाएं
बच्चों के लिए एआई पाठ्यक्रम बिल्कुल नया है। डीडीई मंजू मान ने बताया कि बच्चे इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमसीडी और एनजीओ मिलकर आने वाले दिनों में बच्चों को आईटी के कॉन्सेप्ट को और बेहतर तरीके से समझा पाएंगे। मौजूदा समय स्कूलों में एआई लर्निंग की हफ्ते में 1-2 कक्षाएं चलाई जा रही हैं। इनमें आईटी के पेशेवर बच्चों को पढ़ाते हैं। बच्चे सीखने के बाद प्रैक्टिकल करके सीख रहे हैं। अपशिष्ट प्रबंधन कैसे करते हैं व ग्रीन बिन, ब्लू बिन की जानकारी लेते हैं। वेस्ट टू एनर्जी, प्लास्टिक वेस्ट से दूसरे सामान बनाने के तरीके इत्यादि सीखते हैं।
प्रतिभावान छात्र हुए सम्मानित
एआई के जरिए अपशिष्ट प्रबंधन पर बेहतर समझ का प्रदर्शन करने वाले 137 छात्रों को निगम ने सम्मानित किया है। केशव पुरम जोन के उपायुक्त डॉ नवीन अग्रवाल ने सभी छात्रों को पुरस्कार दिया है। एजी ब्लॉक शालीमार बाग निगम प्रतिभा विद्यालय के मास्टर आर्यन, मास्टर हिमांशु और मास्टर आशु सर्वश्रेष्ठ छात्र घोषित किए गए हैं।
लोगों को सीख दे रहे बच्चे
एमसीडी स्कूलों में नर्सरी से पांचवीं तक के बच्चे पढ़ते हैंै। पायलट प्रोजेक्ट में केशवपुरम जोन के 25 स्कूलों के कक्षा चार और पांच में पढ़ने वाले करीब पांच हजार से अधिक छात्रों को इसमें शामिल किया गया था। इनमें से 137 बच्चे स्कूल के बाकी बच्चों और कॉलोनियों में लोगों को अपशिष्ट प्रबंधन की सीख दे रहे हैं।
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