संसद की सदस्यता रद्द होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहली बार मीडिया के सामने आए और खुलकर मोदी सरकार पर हमला बोला. राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अडानी के रिश्ते को लेकर सवाल किया. इसके साथ ही अडानी की शैल कंपनियों के 20 हजार करोड़ रुपए के बारे में जानकारी दिए जाने की मांग की. राहुल गांधी का कहना था कि मेरा काम देश के लोकतंत्र की रक्षा करना है. देश के गरीब लोगों की आवाज का बचाना है और लोगों को अडानी जैसे लोगों के बारे में सच्चाई बताना है, जो पीएम के साथ अपने संबंधों का फायदा उठा रहे हैं.
राहुल गांधी से सवाल किया गया कि आपके बगल में दो मुख्यमंत्री (अशोक गहलोत और भूपेश बघेल) बैठे हैं, इन सीएम का अडानी के साथ रिश्ता है. उनके राज्यों में अडानी का बिजनेस है. क्या वहां बिजनेस रोका जाएगा? राहुल का कहना था कि साधारण की बात है. मसले को मोड़ने की कोशिश नहीं करना चाहिए. 20 हजार करोड़ रुपए अडानी की शैल कंपनियों में कहां से आए? आप जांच कीजिए. अगर बात निकली कि हमारे मुख्यमंत्रियों के पैसे हैं तो इनको जेल में डाल दीजिए. अगर बात निकली कि किसी और का पैसा है तो उसको जेल में डाल दीजिए.
अडानी की शैल कंपनियों में 20 हजार करोड़ का निवेश किसका?
इससे पहले राहुल गांधी ने कहा कि मैंने पहले भी कई बार बोला है कि हिंदुस्तान में लोकतंत्र पर आक्रमण हो रहा है. इसके हमें हर रोज नए नए उदाहरण देखने को मिल रहे हैं. सवाल मैंने एक ही पूछा था कि अडानी की शैल कंपनियां हैं. उसमें 20 हजार करोड़ रुपए किसी ने इन्वेस्ट किया है. अडानी का वो पैसा नहीं है. अडानी का इन्फ्रास्ट्रक्चर का बिजनेस है. पैसा किसी और का है. सवाल ये है कि जो 20 हजार करोड़ रुपए हैं, ये किसके हैं. ये सवाल मैंने पूछा. मैंने प्रूफ देकर संसद में सवाल किया था. संसद में अडानी और मोदी के रिश्ते के बारे में डिटेल में बोला था. लेकिन, उसे संसद की कार्यवाही से हटा दिया गया. रिश्ता नया नहीं, रिश्ता पुराना है. जब मोदी गुजरात के सीएम बने थे, तब से रिश्ता है. उसके बहुत सारे पब्लिक प्रूफ हैं.
‘मुझे आरोपों का संसद में जवाब नहीं देने दिया गया’
राहुल का कहना था कि मैंने संसद में तस्वीर भी दिखाई थी. फिर मेरी स्पीच को स्पंच किया गया. मैंने स्पीकर को डिटेल चिट्ठी लिखी. लेकिन उसका जवाब नहीं दिया गया. मेरे बारे में मंत्रियों ने संसद में झूठ बोला. मेरे बारे में कहा गया कि मैंने विदेशी ताकतों से मदद मांगी. जबकि मैंने ऐसी कोई बात नहीं की. मैंने स्पीकर से कहा और नियमों का जिक्र किया. उनके चेंबर में जाकर बात की और अपनी बात कहने और झूठे आरोपों का जवाब देने के लिए बोलने का मौका दिए जाने की मांग की.
‘मैं सवाल पूछना बंद नहीं करूंगा’
राहुल का कहना था कि मैंने सवाल पूछना बंद नहीं करूंगा. नरेंद्र मोदी का अडानी से क्या रिश्ता है और 20 हजार करोड़ रुपए किसके हैं, मैंने पूछता जाऊंगा. मुझे कोई डर नहीं लगता है इन लोगों से. अगर ये सोचें कि मुझे अयोग्य करके, धमकाकर, जेल में डालकर चुप करवा सकते हैं तो ये नहीं होगा. मेरी वो हिस्ट्री नहीं है. मैं हिंदुस्तान के लोकतंत्र के लिए लड़ रहा हूं. और आगे भी हिंदुस्तान के लोकतंत्र के लिए लड़ता रहूंगा. किसी चीज से नहीं डरता हूं. ये सच्चाई है.
‘वायनाड के लोगों को चिट्ठी लिखूंगा’
राहुल का कहना था कि मैं सच्चाई को देखता हूं. मैं सच बोलता हूं. सच बोलना मेरे खून में है. ये मेरे जीवन की तपस्या है. इसे मैं करता रहूंगा. मुझे अपनी तपस्या करनी है. इस देश ने मुझे सब कुछ दिया है. प्यार, इज्जत दी है, इसलिए मैं ये करता हूं. राहुल का कहना था कि मैं वायनाड के लोगों को एक चिट्ठी लिखूंगा. वायनाड के लोगों के साथ मेरा पारिवारिक और प्यार का रिश्ता है. मैंने सोचा है कि वहां के लोगों को चिट्ठी लिखूंगा और बताऊंगा कि उनके लिए मेरे दिल में क्या है. राहुल का कहना था कि बीजेपी के नेता नरेंद्र मोदी से डरते हैं. कारण आप जानते हैं. मोदी ने कहा कि ध्यान हटाना है. वो जानते हैं मोदी और अडानी का रिश्ता. इसलिए वो वही करेंगे, जो मोदी ने कहा है.
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